मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) एक बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्था (multilateral export control regime) है। यह एक अनौपचारिक राजनीतिक समझौता (informal political understanding) है, जिसमें 35 सदस्य देश शामिल हैं। इसका उद्देश्य मिसाइलों और मिसाइल प्रौद्योगिकी के प्रसार (proliferation) को सीमित करना है।
स्थापना: MTCR की स्थापना 1987 में G-7 औद्योगिक देशों (कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूके और यूएसए) द्वारा की गई थी।
कारण (Why): इसकी स्थापना का मुख्य कारण परमाणु हथियारों (nuclear weapons) के प्रसार को रोकना था, खासकर उन देशों में जो मानव रहित वितरण प्रणालियों (unmanned delivery systems) जैसे मिसाइलों का विकास कर रहे थे। 1992 में, MTCR का ध्यान परमाणु हथियारों के अलावा सामूहिक विनाश के अन्य हथियारों (weapons of mass destruction - WMD), जैसे रासायनिक (chemical) और जैविक हथियारों (biological weapons) को ले जाने में सक्षम मिसाइलों के प्रसार को रोकने पर भी केंद्रित हो गया।
उद्देश्य (Objectives):
मुख्य विशेषताएं (Key Features):
MTCR दिशानिर्देश (MTCR Guidelines): ये सामान्य निर्यात नियंत्रण नीतियां हैं जिनका MTCR सदस्य देश पालन करते हैं। दिशानिर्देश MTCR के उद्देश्य को परिभाषित करते हैं और सदस्य देशों और दिशानिर्देशों का पालन करने वाले अन्य देशों के लिए समग्र संरचना और नियम प्रदान करते हैं।
MTCR अनुलग्नक (MTCR Annex): यह नियंत्रित वस्तुओं (controlled items) की सूची है, जिसमें मिसाइल विकास, उत्पादन और संचालन के लिए आवश्यक लगभग सभी प्रमुख उपकरण, सामग्री, सॉफ्टवेयर और प्रौद्योगिकी शामिल हैं। अनुलग्नक को दो भागों में विभाजित किया गया है:
नियंत्रण (Control): अनुलग्नक में शामिल वस्तुओं को MTCR भागीदार देशों और दिशानिर्देशों का पालन करने वाले देशों द्वारा नियंत्रित किया जाता है। श्रेणी I के मदों के निर्यात के लिए बहुत सख्त नियंत्रण होते हैं, और उत्पादन सुविधाओं के निर्यात की अनुमति नहीं है। श्रेणी II के मदों के निर्यात के लिए लाइसेंसिंग आवश्यकताओं पर विचार करते समय गैर-प्रसार कारकों को ध्यान में रखा जाता है।
भारत के लिए MTCR की सदस्यता के कई लाभ हैं, जो निम्नलिखित हैं:
उच्च-प्रौद्योगिकी तक पहुंच (Access to High-End Technology): MTCR की सदस्यता से भारत को प्रतिबंधित उच्च-स्तरीय मिसाइल प्रौद्योगिकी (restricted high-end missile technology) तक पहुंच प्राप्त हुई है, जिसका उपयोग वह अपने मिसाइल और अंतरिक्ष कार्यक्रमों (space programs) को आगे बढ़ाने के लिए कर सकता है। उदाहरण के लिए, ISRO को क्रायोजेनिक इंजन (cryogenic engines) विकसित करने के लिए आवश्यक तकनीक प्राप्त करने में मदद मिली है।
हथियार निर्यात में वृद्धि (Enhanced Arms Exports): भारत अब अपनी मिसाइलों, जैसे ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (BrahMos supersonic cruise missile), को वियतनाम जैसे अन्य देशों को निर्यात कर सकता है, जिससे भारत के हथियार निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
सामरिक मिसाइल रक्षा प्रणाली (Strategic Missile Defence System): भारत, इस्राइल से ऐरो-II (Arrow II) जैसी थिएटर मिसाइल रक्षा इंटरसेप्टर (theatre missile defence interceptor) खरीद सकेगा, जो भारत की बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली (ballistic missile defence system) को विकसित करने में मदद करेगा।
निगरानी ड्रोन की खरीद (Procurement of Surveillance Drones): भारत अमेरिका जैसे देशों से निगरानी ड्रोन (surveillance drones) खरीद सकेगा, जैसे कि प्रीडेटर (Predator) ड्रोन।
'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा ('Make in India' Boost): MTCR सदस्यता 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम (Make in India program) को भी बढ़ावा देगी, क्योंकि भारत में विकसित या निर्मित तकनीक को देश से बाहर ले जाने में आसानी होगी।
कूटनीतिक लाभ (Diplomatic Leverage): MTCR की सदस्यता भारत की स्थिति को एक जिम्मेदार परमाणु राज्य (responsible nuclear state) के रूप में मजबूत करती है और परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (Nuclear Suppliers Group - NSG), ऑस्ट्रेलिया समूह (Australia Group) और वासेनार व्यवस्था (Wassenaar Arrangement) जैसे अन्य बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण शासनों (multilateral export control regimes) में सदस्यता के लिए भारत के मामले को मजबूत करती है।
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: भारत अब अन्य सदस्य देशों के साथ मिलकर मिसाइल प्रौद्योगिकी के विकास पर संयुक्त कार्यक्रम चला सकता है।
MTCR की सदस्यता से भारत पर निम्नलिखित दायित्व आते हैं:
सूचना साझा करना (Information Sharing): भारत को अपनी सैन्य और तकनीकी संपत्तियों (military and technological assets) के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी अन्य सदस्य देशों के साथ साझा करनी होगी।
परामर्श (Consultation): भारत को किसी भी MTCR मद (item) के निर्यात के संबंध में अन्य सदस्य देशों से परामर्श करना होगा, विशेष रूप से उन मदों के बारे में जिन्हें किसी अन्य भागीदार देश ने अस्वीकार (deny) कर दिया है।
राष्ट्रीय कानूनों का संरेखण (Alignment of National Laws): भारत को MTCR दिशानिर्देशों के अनुसार परमाणु प्रौद्योगिकियों (nuclear technologies) और निर्यात नीतियों (export policies) के विकास, हस्तांतरण और खरीद से संबंधित अपने राष्ट्रीय कानूनों (national laws) को संरेखित (align) करने की आवश्यकता है।
निर्यात नियंत्रण (Export Control): भारत को बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों, मानव रहित हवाई वाहनों, अंतरिक्ष प्रक्षेपण यानों, ड्रोन, दूर से संचालित वाहनों, साउंडिंग रॉकेट, और अंतर्निहित घटकों और प्रौद्योगिकियों के लिए राष्ट्रीय निर्यात नियंत्रण नीतियां (national export control policies) स्थापित करनी होंगी।
S MTCR (मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम) की सदस्यता भारत के लिए NSG (न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप) की सदस्यता के रास्ते को पूरी तरह से प्रशस्त नहीं करती, लेकिन यह निश्चित रूप से भारत की दावेदारी को मजबूत बनाती है। यहां दोनों के बीच संबंध और भारत की स्थिति को विस्तार से समझाया गया है:
MTCR और NSG के बीच संबंध:
MTCR सदस्यता भारत की NSG दावेदारी को कैसे मजबूत करती है:
चुनौतियां:
MTCR की सदस्यता भारत की NSG दावेदारी के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन यह एकमात्र कारक नहीं है। भारत को NSG सदस्यता प्राप्त करने के लिए चीन सहित अन्य देशों के विरोध को दूर करने और NPT पर हस्ताक्षर न करने के मुद्दे का समाधान खोजने की आवश्यकता होगी।
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